Friday, April 26, 2013

41th Day :: A new subject which can solve many problems if added to education system


आज हम कई बड़ी सामाजिक समस्याओं से जूझ रहे हैं और लोगों को सच्चाई, ईमानदारी, जिम्मेदारी आदि मौलिक गुणों को अपनाने के लिए तैयार नहीं कर पा रहे हैं तो इसके लिए education का सभी लोगों तक पहुँच पाना और education system में कमी मुख्य वजह है।
मेरे ख्याल से किसी भी education system का सबसे बड़ा उद्देश्य लोगों में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना और सही-गलत में फर्क करना सिखाना होता है। इसलिए मैं समझता हूँ कि किसी education system की सबसे बड़ी असफलता लोगों द्वारा गलत उद्देश्य चुनना होता है। हम जानते हैं कि अगर उद्देश्य सही हो तो उसे पाने के लिए अपनाया गया गलत रास्ता भी सही माना जाता है। हालाँकि हम व्यावसायिक शिक्षा को neglect नहीं कर सकते क्योंकि आज के दौर में रोजगार के लिए यह जरूरी है। लेकिन जिस तरह से आजकल व्यवहारिक शिक्षा को पूरी तरह neglect करके केवल ऐसी शिक्षा दी जा रही है वो गलत है।
उद्देश्य का गलत होना या सही-गलत में फर्क कर पाना या सही काम को दृढ़ता के साथ अमल कर पाना कुछ ऐसी समस्याएं हैं जो केवल हमारी सामाजिक जिंदगी को प्रभावित करती हैं बल्कि ये रोजगार के मामले में भी तरक्की करने से रोकती है। लोगों को सही निर्णय लेने में सक्षम बनाने और सही उद्देश्य चुनने लायक बनाने के लिए हमें सबसे पहले यह जानना होगा कि लोग आखिर गलत चीजें क्यों चुनते हैं और ये बताने पर भी कि सच्चाई, ईमानदारी आदि अच्छी चीजें हैं इसलिए इन्हें अपनाना चाहिए, लोग इन्हें क्यों नहीं चुनते। मेरा मानना है कि हममें से अधिकतर लोग दूरदर्शी नहीं होते इसलिए गलत चीजों के त्वरित फायदे हमें दिखाई देते हैं लेकिन इसके दूरगामी भयानक परिणाम नहीं दिखाई देते, इसी तरह हमें अच्छी चीजों के त्वरित नुकसान या कठिनाइयाँ तो दिखाई दे जाती हैं लेकिन इसके दूरगामी किन्तु काफी अच्छे परिणाम हमें दिखाई नहीं देते। इसलिए अगर हम लोगों को दूरदर्शी बनाकर गलत चीजों के दूरगामी भयानक परिणाम और सही चीजों के दूरगामी किन्तु काफी अच्छे परिणाम को समझाने में सफल हो जाएँ तो हम काफी हद तक लोगों को अच्छी चीजों को अपनाने और गलत चीजें अपनाने या छोड़ने के लिए राजी कर सकते हैं।  हम लोगों को यह तो बताते हैं कि क्या सही है और क्या गलत, लेकिन हम ये नहीं बताते कि क्यों सही है या क्यों गलत है और सही को कैसे अपनाएँ या गलत को कैसे छोड़ें। इसीलिए लोग सही चीजों को नहीं अपनाते। 
Comparison of some great people on the basis of their target:- 
  • Einstein Vs Edition- 
  हम लोग इन दोनों को ही महान व्यक्ति के रूप में जानते हैं। कहा जाता है कि Einstein के जैसा दिमाग वाला कोई दूसरा पैदा नहीं हुआ लेकिन मैं Thomas Alva Edition को Einstein से बेहतर वैज्ञानिक मानता हूँ  क्योंकि मैं किसी को तेज दिमाग या प्रतिभा की वजह से नहीं बल्कि उसके जनहित में किये गए कार्य की वजह से महत्वपूर्ण मानता हूँ। Edition ने जितने भी आविष्कार किये वो सभी समाज के लिए बहुत ही उपयोगी थे, वहीं Eienstein ने कुछ अच्छे theories और अविष्कारों के साथ परमाणु-बम जैसा महाविनाशक हथियार भी बनाया जो आज भी दुनिया के लिए एक बड़ा खतरा है, इसलिए परमाणु-बम Eienstein की समाज के प्रति उनकी गैरजिम्मेदारी को दर्शाता है। Edition ने एक और अच्छा काम किया था। उन्होंने मात्र तीसरी कक्षा तक पढकर भी इतने बड़े आविष्कार करके यह जता दिया कि डिग्री किसी की प्रतिभा का वास्तविक पैमाना नहीं बल्कि सिर्फ एक अनुमान भर है।

  •  Shakespear Vs Kabir & Rahim- 
आजकल उच्च शिक्षा प्राप्त लोगों के मुँह से Shakespear की तारीफ़ सुनकर ये तो लगता है कि ये कोई बड़ा विदेशी साहित्यकार था लेकिन साथ ही ये सोचकर बेहद अफ़सोस और दुःख होता है कि ये लोग उन भारतीयों को क्यों भूल जाते हैं जिन्होंने समाज-सेवा में अपना सारा जीवन और साहित्य की सारी विधाओं को लगा दिया। मुझे लगता है कि सदियों कि गुलामी ने हमें मानसिक रूप से गुलाम बना दिया है, इसलिए हम विदेशियों के हर चीज का गुणगान करते हैं लेकिन अपने देश की अच्छाई और हमारे देश की बेहतरी में योगदान देने वालों को भूल जाते हैं।
मैं मानता हूँ कि Shakespear ने भी कुछ अच्छे विचार दिए हैं जिनको अपने जीवन में अपनाकर हम महत्वपूर्ण बन सकते हैं लेकिन भारत में, भारतीय परिस्थितियों के अनुभव के आधार पर, समाज के उत्थान के उद्देश्य से रचित काव्य और साहित्य, समाज के उत्थान में ज्यादा योगदान दे सकते हैं कि विदेशी परिस्थितियों में उपजे Shakespear के विचार   वैसे भी Shakespear महाकाव्य रचने की अपनी प्रतिभा के लिए जाने जाते हैं कि समाज के हित में रचित काव्यों के लिए और मेरा मानना है कि जो रचना समाज को फायदा नहीं पहुँचा सकती  वो महान हो ही नहीं सकती   इसलिए मेरे लिए कम-से कम भारतीय परिस्थितियों में कबीर-रहीम और इनके दोहे जितने महान हैं उतने Shakespear या उनकी कोई रचना नहीं।

इन दोनों उदाहरणों से स्पष्ट है कि कोई व्यक्ति अपनी प्रतिभा या तेज दिमाग के कारण महत्वपूर्ण या महान नहीं होता बल्कि समाज के हित में दिए गए योगदान के कारण महान होता है। इसलिए हमें समाज-सेवा को हर व्यक्ति की मुख्य भावना बनाने का प्रयास करना चाहिए, तब व्यक्ति जो भी उद्देश्य चुनेगा वो सही होगा। तभी देश का हर नागरिक देशहित में महत्वपूर्ण योगदान दे सकेगा।
इसके लिए समाज-सेवा या 'सबकी ख़ुशी में मेरी ख़ुशी' की भावना को शिक्षा के द्वारा ही लोगों के दिलों तक पहुँचाना होगा। जिसके लिए मैं चाहता हूँ कि हमारे education system में एक और subject को add किया जाय।
The Motto of New subject:- 
  1. 1st of all try to make a good target for all. here are some steps for it-
    • tell what is right or wrong.
    • tell why they are right or wrong.
    • tell how do right things like honesty, boldness,helping others, respect for others etc help us in living our life with most happiness.(by giving appropriate examples as stories)
    • why do we should avoid wrong things & how they bring problems in our life.(by giving appropriate examples as stories)
    • tell how do they can adopt the right things & discard the wrong.

  1. give the people a compass which can indicate the direction of their target to achieve. so that they can know at any time that they are in right way or wrong & which path they should follow to achieve their target.

 The parts of new subject :-

  1. Good books to make a positive attitude in students :  in starting it can teach for how do the basic things like Honesty, Boldness, Helping others etc are necessary for them to be successful & to live life with happiness by giving appropriate stories. After that attitude adopted by successful & great people by giving their biography. for higher education it should be intended specially towards adopting the main virtues of top successful men of student's respective fields by giving biography of these men.
  2. Meditation :   it is a necessary physical & mental exercise for adopting positive virtues & discarding negative things. in one word meditation is an exercise to release -ve energy & adopt +ve energy.
  3. Psychological advice & career counciling :     we know that many student do not get sufficient marks even on working hard & having talent, because of exam pressure or pressure due to domestic problems. Also we see news about suiciding of students because of failure. So it will be a great help if one adviser is available in school who can tell students how to face domestic problems, how they should study so that they can get best result, how they should handle exam pressure even when they are not well prepared, how they can hold hope even after a failure & can convert their failure into base of success in future, how they can know what field is best for future on the basis of their performance in study & their interest.
*    the new subject should never have the importance of numbers, instead of it should be focused to solve the student's problems & to make student's interest in subject.
*    the teacher should be well experienced & it's better if he has been a psychologist for at least 2 years. May be such a teacher demands for higher payment, but benefit of such a teacher & subject is even bigger.

Scope of this type of study in other fields :-

 i know many people will say it useless & not practical but i shall say to them if  sex-education can have use for students & can be practical then why not it?  i think this subject has benefits for all. if it is started in India, then it is sure that one day it will be the main subject of the top-most colleges in the world & India will be respected for being the first country to start this subject.
 The people trained to taught this subject will have big probability of getting employment not only in the educational field but also in other fields like-
  • for people involve in atleast 2 disputs or bigger crime :   we know many small criminals become big in future. so if we can stop people from becoming big criminals by giving right advice at right time, i.e. just after any small crime. After a limit We can make a necessary rule for taking advice. then the trained man will give advice like why living with moral values is the best way to get maximum happiness, quietness, relief etc or how a criminal life is full of sadness, problems, dullness etc & how they can be used or forced to do big crime if they are continuously indulge in even small crimes how the criminals after some time feel sorry for doing bad works when they have no way to get out from crime-world.
  • for criminals punished for big crimes :   here he can say to say what they are feeling after doing crime, what other good option they had & what they would feel if had chosen the right option. how they are being used or may be used in future by any mastermind man. in the last tell them how to live a good life after leaving the criminal life etc.
  • In Companies :      if the trained man has studied about the business life of people & knows the expectations of a company from a serviceman & attitude required, then he can motivate the all staff to do better.