Friday, June 17, 2011

12th Day :: Bazaarvaad : D most fatal thing today

इधर कुछ दिनों से स्वदेसी आन्दोलन जोर पकड़ता जा रहा है. भ्रष्टाचार , काले धन के साथ-साथ यह मुद्दा भी ज़रूरी है, मैं  मानता हूँ, लेकिन जिस तरह से हमारे देश की सारी समस्याओं के लिए सिर्फ विदेशियों को दोष देकर हम अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ले रहे हैं, वह गलत है. हमें यह ध्यान रखना होगा कि  विदेशी मुद्दे की हवा में हमारे देश के अपने लोग जो भ्रष्टाचारी हैं , वे न बचने पायें और ये मुद्दा हिन्दू-मुस्लिम मुद्दे की तरह हमारे देश के भ्रष्ट राजनेताओं के लिए एक नया 'political weapon' न बन जाये.

 सौभाग्य से पिछले कुछ दिनों में कुछ special persons & special conditions की वजह से हिन्दू-मुस्लिम मुद्दा और स्टेट, भाषा आदि मुद्दों को जनता ने सामाजिक सौहार्द्र से समाप्त कर दिया है या कम कर दिया है, इसके लिए मैं लोगों को बधाई देता हूँ. लेकिन जिन लोगो का फायदा लोगों के आपसी झगड़े से ही होता है, वो ऐसे मुद्दों के सहारे सामाजिक सौहार्द्र को बिगाड़ने और अपने राजनैतिक हित साधने की कोशिश कर सकते हैं. इसलिए हमें यह मुद्दा पूरी समझदारी के साथ उठाना चाहिए और अपना aim निर्धारित करना चाहिए कि हमें सिर्फ विदेशियों का विरोध करना है या हर तरह के (देश के अंदर और बाहर दोनों) लूट और भ्रष्टाचार का विरोध करना है. हमें यह ध्यान रखना होगा कि विदेशियों और multinational companies का विरोध करने में हम इतने न खो जाएँ कि हमारे देश की  companies और भ्रष्टाचारियो को देश लूटने की खुली छूट मिल जाए. वैसे इस बात की गारंटी भी कोई नहीं दे सकता कि बाहरी कंपनियों पर रोक लगाने के बाद ये स्वदेशी नाम रखकर हमें वही product नहीं बेचेंगी . और तब हम स्वदेशी का ठप्पा देखकर उसी चीज़ को और भी ऊँचे दाम पर नहीं खरीदेंगे !
e.g. अंग्रेज़ चले गए , मगर उनकी 'बाँटो और राज करो' की नीति हमारे राजनेता आज भी इस्तेमाल करते हैं और हम उन्हें 'अपना' समझकर उनका विरोध भी नहीं करते।

 इतिहास गवाह है कि जिस देश या साम्राज्य को बड़ी-बड़ी बाहरी शक्तियां पराजित नहीं कर पायीं वहां कुछ अंदरूनी स्वार्थी तत्वों ने पीठ में छुरा भोंक कर तख्तापलट कर दिया और मनमाने ढंग से लूटा . वर्तमान में पाकिस्तान इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है और past में खुद हमारा अपना देश .
हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि अंग्रेज हमारे देश पर राज कर पाए तो सिर्फ कुछ लालची व्यापारियों और कुछ स्वार्थी राजाओं  के वजह से ,  जिन्होंने अपने आपसी झगडे और स्वार्थपूर्ति के लिए अंग्रेजों का साथ दे दिया .
  और अगर अंग्रेज ही हमारी सभी परेशानियों कि जड़ थे तो आज़ादी के 50 -60  वर्षों बाद भी हम अपना पर्याप्त विकास क्यों नहीं कर पाए , इन वर्षों  में देश के सरकारी धन को लूटने वाले क्या वही अंग्रेज थे ? नहीं , ये हममे से ही थे और आज भी हैं .  हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि सामने के दुश्मन से लड़ना आसान होता है क्योंकि वो दिखाई देते हैं लेकिन पीठ में छुरा भोंकने वाले हमेशा ज्यादा खतरनाक होते हैं। . 




इसलिए हमें किसी का भी विरोध सही और गलत के आधार पर करना होगा और समर्थन उसकी क्वालिटी के आधार पर. यानी की in d last we have to choose what is really beneficial to our health, family & country then discard what is harmful or unnecessary.
 मदर  टेरेसा एक विदेशी  महिला थी, तो क्या हम हमारे देश के दीन-दुखियों के लिए किये गए उनके कार्यों को भुला सकते हैं? नहीं. मगर अगर वो आज जिंदा होती तो ये राजनेता और धर्म के ठेकेदार (जो अपनी गुलाम मानसिकता को लोगो पर थोपने के लिए किसी भी अच्छे काम या परिवर्तन को बर्दाश्त नहीं कर सकते ) उन्हें भी विदेशी agent करार दे देते. अगर  टेरेसा जैसे लोग सिर्फ इसलिए गलत मान लिए जाए क्योंकि वो विदेशी थे  तो अफ्रीका में गाँधी जी को भी नहीं पूजा जाना चाहिए.स्वामी विवेकानंद जी  को  हमने तब तक महत्व नहीं दिया जब तक कि वो  विदेश में लोकप्रिय नहीं हो गए. वर्तमान में देखें तो हमने योग को तब तक नहीं स्वीकार किया जब तक कि ये विदेश जाकर 'योगा' नहीं बन गया जबकि इससे हम अच्छी तरह परिचित थे .
  मैं इस  तरह विदेशियों का गुड़गान नहीं कर रहा हूँ बल्कि ये कह रहा हूँ कि विदेशियों में भी कुछ लोग अच्छे हैं , past में जिन्होंने हमारे देश की आज़ादी और विकास में योगदान दिया है और आगे भी हमारी help कर सकते हैं.  e.g. जर्मनी ने सुभास चन्द्र बोस  को आज़ाद हिंद फ़ौज बनाने में मदद किया था और वो भी बिना किसी लालच के , क्योंकि उस समय हम खुद गुलाम थे तो जर्मनी को कोई फायदा कैसे दे सकते थे .


अगर सही-गलत में फर्क किये बिना हम हर विदेशी चीज़ का बहिष्कार कर देंगे तो हम ये कैसे सोच सकते हैं कि विदेशी हमारी चीज़ों को स्वीकार करेंगे, फिर चाहे वो हमारा योग , अध्यात्म , आयुर्वेद हो या हमारे serviceman, bussinessman aur student ही . पर्यटन भी विदेशियों पर ही निर्भर होता है. मतलब कि कुछ चीज़ों के लिए हम भी विदेशियों पर निर्भर हैं. अब सवाल ये है कि हम कर क्या सकते हैं ?


 हम बहुराष्ट्रीय  कंपनियों और अपने देश के भी कुछ लुटेरी कंपनियों का विरोध कर सकते हैं , इनके unnecessary products  को न खरीदकर हम अपने धन की बर्बादी को रोक सकते हैं और इन्हें सही , helthful product  उचित दाम पर बेचने के लिए मजबूर कर सकते हैं .
 अगर हम ध्यान दे सकें तो हमें महसूस होगा की अँगरेज़ भी एक कंपनी के रूप में भारत में आये थे जिसका नाम था 'ईस्ट इंडिया कंपनी'  और हमारी नासमझी का फायदा उठाते हुए हमें लूट कर चले गए .
वास्तव  में किसी कंपनी का कोई जाति , धर्म या देश नहीं होता , इनके लिए सभी ग्राहक हैं  और इनका उद्देश्य किसी भी तरह से लूटना होता है . ग्राहक चाहे अपने देश का हो या विदेश का इन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ,ये किसी को कोई concession नहीं देते .
दूसरों को क्या कहें अब तो हमारे देश में भी सरकार background में ही सही पर corporate world द्वारा ही उनकी सुविधानुसार ही चलाई जा रही है न की जनता  के सुविधानुसार . हमारी विदेश नीति तो 100% corporate world के इशारे पर बनती है . china के दबंग व्यवहार और बिना गारंटी वाले बेहद घटिया सामान से हमारे लोगों , कंपनियों और सरकार को  होने वाले  आर्थिक नुकसान (जो की पकिस्तान के नकली नोटों से होने वाले नुकसान से भी ज्यादा है ) और युद्ध में अपने जवानों को खोने  के बावजूद हम अगर चीन को गले लगाने को बेताब  हैं तो इसके पीछे हमारी दरियादिली नहीं बल्कि परदे के पीछे का गुप्त समझौता है की "तुम हमारे लोगों को लूटो और हमें अपने लोगों को लूटने दो" . हमारे देश में  जनसँख्या का मुद्दा क्यों समाप्त हो गया ? इसलिए नहीं की ये अब कोई समस्या नहीं रहा बल्कि इसलिए कि इन कंपनियों को लूटने के लिए अधिक ग्राहक ,काम करने के लिए सस्ते वर्कर मिलते हैं और हमारे नेताओं को वोटर !


 वैसे किसी कंपनी का कोई अपना देश नहीं होता . ये हमारे देश को लूट रहीं है तो अपने देश को भी नहीं छोड़ती . आखिर विदेशी अपने देश में भी पानी की बोतल लेकर क्यों घुमते है ? कुछ लोग इसे care 4 hygiene कहते हैं , पर वास्तव में ये पानी की बोतल बेचने वाली कंपनियों द्वारा फैलाया गया डर है जो उन्हें hyper hygienic बनाता है . इसी वजह से वे handpump जैसे पानी के direct स्रोत से कतराते हैं .
अपने देश में एक रेल मंत्री द्वारा  plastic glasses की जगह मिट्टी के कुल्हड़ और cold drinks की जगह milk products लॉन्च  करवाया गया था मगर उनके जाते ही ये सभी प्रोडक्ट रेलवे स्टेशनों से हट गए , क्या इसके पीछे ऐसी ही कंपनियों का हाथ नहीं हो सकता ?

इसलिए आज परिवारवाद , साम्राज्यवाद , क्षेत्रवाद, सम्प्रदायवाद के बाद बाजारवाद को दुनिया से मिटाने का समय आ गया है !

* Some fatal example of Bazarvaad :-
      1.  कई लोग मीठे पान-सुपारी से शुरुआत करते हैं फिर ज़र्दा पान-सुपारी, फिर गुटखा, बीड़ी, सिगरेट, भांग, बियर से होते हुए शराब-शबाब और अंत में गांजा, चरस  और हेरोइन तक पहुँच जाते हैं।
      2. हर साल त्योहारों की संख्या में हो रही वृद्धि भी बाजारवाद का ही उदाहरण है जिनमें महिलाओं को मुख्य रूप से टारगेट किया जाता है और जो हर परिवार की अर्थव्यवस्था पर पूरे साल बोझ डालता है।
      3. ज्यादा दहेज़ के चलन को भी बाजारवाद से प्रेरित माना जा सकता है।

Sunday, June 5, 2011

11th day :: Benefits of certainty of death

Very-very thanx 2 god 4 making death 'certain',so that it is present in our mind as an universal truth which teaches us d way 2 live in many ways...


1. we know that our life is limited,so that we get forced 2 do d works  also in a fast way & enjoy d life more n more b4 it gets lapsed. As a result we get forced 2 leave our laziness ...


2. we know that whatever we do 2 save us 4m death, it will come certainly one day, then y fear 4m death. it makes us freeminded even in a very bad situation which allows us 2 think freely n make good decision in that bad situation when generally one's mind gets closed n couldn't be able 2 think anything.


  Some other benefits r also may exist but this time my mind can't get more ...  buy....
  Be cooool !

Thursday, May 26, 2011

10th day :: reason 2 like Sri Krishna

I never read 'Geeta', only 1 shlok of it i have read-'कर्मण्ये वाधिकारस्ते माँ फलेषु कदाचन .which means-'कर्म करते रहो परन्तु फल की चिंता मत करो'(although i want 2 add in last- 'if u r right through ur approach') & also in my area bhagwan Ram is more devoted than sri Krishna, also in my home we have a mandir of devi Durga yet i'm more devoted 2 sri Krishna b'coz he live his life in a way that is maching d way which i think an ideal life & also want 2 live like him.
 I like him b'coz unlike of all other gods he was not a king by birth, he live his childhood in ordinary way with some very ordinary people but become d king of kings only by his कर्म.
 Next reason is that he remain in touch with common people from childhood till end of his life.
 3rd reason which i like most is that all people who come in his touch, started 2 love him instead of fearing with his powers & doing d 'Pooja'.  B'coz i think when u make pooja, then even with all ur efforts u never can realise that god is urs. but when u love him, u will find him as someone ur own like ur close relative or friend, who cares 4 u all d time. plz forgive me if u r thinking that i'm saying 2 do something like our 'I.G. Panda'. no, it's not which i'm saying,it is blindness. even i don't believe in 'Bhakti', i believe only till d level of  'Sraddha' in god. b'coz till this level ur eyes remains open & u can complete ur duties 4 ur family n society.
 I like krishna ji's teachings b'coz he never said 2 escape our society n duties towards them 2 find only so called 'Mukti' & 'Happiness'.
 also i'm not ignoring d hard efforts 2 exercise 'tyag','leaving moh etc. of saints but these all r 4 that we can do 4 goodness of society or world & if anyone can make d world happier(i.e. can make d +ve change in world) with living normal life n without leaving his primary duties towards his family n society, then he is better than a saint who have more knowledge but can't do anything 2 help d world...
 One benefit of doing good with living normal life is that people easily make believe in them n start 2 think like this - " जब ये हमारे बीच का आदमी हमारे जैसे condition में रहकर महान काम कर सकता है तो हम भी कर सकते हैं ".

Thursday, April 7, 2011

9th day :: Helping nation

What can we do 2 make our nation great. I think 1 thing  we have already done by applying democracy in india, now we have 2 make only democracy more powerful 2 make india as a great nation.
 D main factor of democracy r common people, so we have 2 empower d common people 2 make our nation mighty.
 we have 2 educate our people more & more in such a way that they can know their duty & powers, also they should be able 2 make decisions.
   Thus we have all 2 do is only make our people be able 2 make decisions about our nation & then give them power 2 decide.....!!!

Friday, April 1, 2011

8th day :: Education system

Our education system should be in such a way that it can help in living our life more comfortably.
I think it should have 2 main aims :-
1-  person should know his general duties & powers.
2-  person should get comfortable services & powers on d basis of till what level he has studied.
 I'm writing it b'coz i have seen that an engineer has studied more than a clerk but he still faces problems during any official work being done by that clerk.


 1 more aim i'll want 2 add that we should give person an option to choose d field of his interest without any pressure for study & then we should manage a job 4 him in that field if it's possible practically...

7th day :: D Selfishness

Selfishness is assumed 2 be a worse word in people, but i have found it also useful. we would need it while doing great works without having a sense of ego in ourselves. In this way we never assume us as a great man, thus never create ego in us. this approach is important b'coz at d point when we assume us a great man, infact d sliding point 4m top.
My brother always used 2 say that 'I' is d 1st person,'U' second & all 'Others' r third person, so apply this priority order before handling any matter.thus if u want 2 make any change in all 'Others', u should make change in u 1st.
  We can see many ex. of it in our daily life.  Infact near about  all rules & regulations r made 4 advantage of human being or humanity.
 e.g.  if u help any man after accident on d road then some other people also will be inspired by u & will help others in any trouble. Thus u will have more chances 2 get helped by someone when u r in any trouble...!!!

* Here selfishness doesn't mean "to be Selfish", it just means to assume us as a Selfish person...

6th day :: success

Success & failure r only 2 sides of life to which we have 2 face.
 4 being a great man we have 2 face both of these sides without loosing confidence.
i.e.  we should neither be hopeless at any failure nor be too excited at any success, so that our feet remain on d earth.

Tuesday, March 29, 2011

5th day :: D believe

Never believe anything 100% except god. this atleast 1% of disbelieve makes remain our feet on ground & our eyes open. Also it helps in finding new ways 2 solve any problem.

 when u believe anything 100%, ur eyes becomes closed & then u can't see what is right  or wrong about that thing. In this state any selfish man can misuse you to take benefit ...
 thus it creates problems...!!!

Wednesday, March 23, 2011

4th Day :: Nature

Nature is closely relates 2 Heart. it is just d possibility of what decision will u take on any particular condition.
 i.e.  if anybody says that he knows d nature of          other person, it means that he knows in what condition other person will take what decision(or action).
  D Nature is most imp factor in finding a true lover 4 anybody. 4 true love, it should be same or fulfilling each others needs... i.e. their likes & dislikes should be same n they should understand & support 4 each others problems. 

3rd Day :: base of Decision making

It can be a point of arguement that at what base we take decisions, d mind takes d lead role or d heart.
After much thinking & research, i got an answer that mind only argue on any matter but heart takes d decision on d basis of arguement made by mind & successful decisions taken in d past.
i.e.  Heart has a full record of successful & fail incidents occurred in d past & on that basis it takes decisions.
 Making it more clear i can say that- In d starting   it takes decision on d basis of what others (our close relatives & by books) have told 2 do in that condition.Heart applies this approach 4 present & future problems in same condition untill it becomes fail in any particular condition. after failer of this approach, heart orders mind 2 search 4 alternate method & after finding alternate successful method, heart stores it as a default method 2 apply in that case in future.
thus it renews it's default setting same as a program on computer, which needs 2 upgrade on facing new problems or conditions.
 On this basis u can also say that mind is like an 'Advocate' which arguements on any matter before any decision takes place & heart is like a 'Judge'  who takes d final decision.


  My this analysis can help u certainly  in finding a true lover 4 u. I have seen people especially girls(b'coz their heart overcomes their mind ) do not use their brain much before they love anyone. thus they give others d control of their heart easily  & if once a man gets d control over Judge(heart), no matter can be justified whether advocate(mind) then makes arguement or not. 
 It's d main reason why we neglect or even can't bear d objections against our loved one  even if he(or she) is a criminal. instead it's also possible that we make arguement in d favour of him(or her).

Saturday, February 26, 2011

2nd Day :: the Confusion

Hiii frnds... today i'm going to discuss my 1st topic which i have choosen as 'Confusion'. U will ask why this at starting but i have a reason 4 it. D more topics i will discuss in future, u will realies more d importance of it. People close to me know me as a confusive person & there was a time when i also used to blame me 4 my confusions.. Although it is of no use when u have 2 take instant decisions like in exams but it has a great use when u have 2 make any positive change in old thoughts or rules & regulations. e.g. if u r researching on any topic, u will have 2 search 4 a point where default rules r not applicable. Then u will search 4 alternate rules which is more appropriate in that case. If u can see, This whole process will pass through a state of confusion.
Thus although i accept it's negative side when we have 2 take instant decision as i have told before yet it has a positive side in making new thoughts n rules.
i feel that more time u take 2 decide on any matter, more clear result u will get. Because in this way u have studied that subject more deeply, u will be more confident about ur result n it can help u in future 4 similar problems. In this way u will get a confidence which not only make u bold but u can show path 2 others.
I have 1 more eg 4 u :- suppose u have 2 go any place which have 10 ways. Now if u ask someone n he tells u a right way, then u know about only 1 way but if u search d way by yourself, u will find more ways n thus can judge d better way. Also in case if u find all d 10 ways, u will know which way would be d Best 4 U ...

* The pro's of confusion is that you can discover new ways without having much will power to break traditional thinking but con's is you don't know that the new door you open will open the way to heaven or hell...!

Aaj bahut ho gaya, baad me phir milunga kisi new topic k saath....
........gud buy !

Wednesday, February 23, 2011

1st Day : the intro

Hiiii frnds, i'm very glad today by starting my blog. U know i'm a thinking person from childhood,i was always thinking about life & whatever going on my nearabout,country or in all over world but i got some clear vision after 2005,when i had started " MEDITATION ". Still i was feelling a lack of feedback on my thoughts so that i can judge myself & can get right things from my thinking & discard d wrong...clearly this blog has given me d all what i really need..i hope u will help me by commenting on my blogs & by taking part in d poll if i will organise......Thank U.........Be coool & confident !!! 

*  If you found anything unnecessary or wrong at my blog by your approach then never follow that  .  This blog is more for myself than for you & it works like a reminder for me that what I have set to do for me..!
Thanks....