Wednesday, August 16, 2017

69th day :: reality of dreams

ज़िन्दगी में हम सभी consciousness में रहते हुए एक लक्ष्य तय करते हैं और उसे पूरा करने का प्रयास करते है। यही 'लक्ष्य तक पहुँचने की इच्छा' को हम 'dream' (or  vision ) कहते हैं। जाने -अनजाने में यह 'इच्छा' (dream )  हमारे unconscious mind में भी स्टोर हो जाती है। इसलिए जब हम unconsciousness की दशा (or sleeping position) में होते है तो हमारा unconscious mind उस अधूरी इच्छा को पूरी करने के लिए एक पूरा animation या वीडियो बनाकर हमें हमारी इच्छा को पूरी होते हुए दिखाता है।
dreams के बारे में एक और बात सच है कि ये तभी आते हैं जब दिमाग में स्थित hormones में disbalance होता है या हमारा unconscious mind जागता रहता है।
एक स्वस्थ व्यक्ति जिसका सोने -जागने का समय निश्चित हो ,कोई तनाव न हो ,खाने -पीने की मात्रा निश्चित और उचित हो या hormonal disbalance न हो,  तो उसे सपने आने की probability भी बहुत कम होती है। इसका voice -versa भी उतना ही सही है।
e.g.   हम रात को खा-पी कर समय पर सो गए और हमारे उठने का समय 7 am  है लेकिन रात में 3 am को हमें पेशाब लग जाए तो क्या होगा?चूँकि हम उस समय नींद में हैं और हमारा conscious mind सोया रहता है ,हमारा unconscious mind work करता है।  अब चूंकि हमारे hormones सिग्नल दे रहे हैं कि हमें पेशाब करना है , तो हमारा unconscious mind एक animation create करेगा कि हम किसी जगह गए हैं और वहां एक नाली है , जिसमे हम पेशाब कर रहे होते हैं लेकिन असल में हम बिस्तर पर पेशाब कर रहे होते हैं।
बड़े होने पर तो हम कण्ट्रोल कर लेते हैं या जाग जाते हैं लेकिन बचपन में हम सभी ने ऐसा किया होगा। ///

Tuesday, August 15, 2017

68th day :: Modi or Tuglak

मीडिया में आजकल देश के प्रधानमंत्री मोदी जी छाए हुए हैं। पर क्या मोदी जी इतने चमत्कारिक हैं , जितना कि प्रचारित किया जा रहा है। लेकिन हक़ीक़त की जमीन पर मोदी क्या हैं ?
मेरे हिसाब से मोदी वर्तमान के तुगलक हैं  जो बहुमत की सत्ता के मद में चूर होकर , अपने विरोधियों को तो छोड़िये अपने सहयोगियों और अन्य एक्सपर्ट्स की राय लिए बिना फैसले पर फैसले लिए जा रहे हैं। ऐसे तानाशाही शासन को जनता कब तक बर्दाश्त करेगी।
मीडिया हर गलत फैसले की तुष्टिकरण के लिए कुछ खरीदे हुए लोगों के मुख से मोदी जी के पक्ष में कुछ बाते कहलवा दे रही है और देश की जनता टीवी के सामने बैठकर 'All is Well' के सपनों में जी रही है।
अब मोदी जी के तुगलकी फरमानों पर एक नज़र डालते हैं :-
मोदी जी ने सत्ता में आते ही 100 दिनों के अंदर काला धन देश में वापस लाने का सपना दिखाया था। बहुत शोर - शराबे के बाद आज का सच ये है कि कालेधन का मुद्दा दबाने के एवज में मीडिया और पॉलिटिक्स से जुड़े कई लोग 'slumdog millionair' की ही तरह slumdog से millionair बन गए और जनता आस लगाए बैठी रही। जनता यही सोचती रही कि मोदी जी के घर देर है अंधेर नहीं।
लेकि अंधेर भी तब हो गयी जब एक सुबह खबर मिली कि 500 और 1000 के नोट बंद कर दिए गए। इसके बाद आम जनता को सैकड़ों दिन लाइन में खड़ा कराने के बाद भी 'All is Well'  की थपकी के रूप में सांत्वना दी जाती रही।
फिर आया एक और तुगलकी फरमान देश में 'डिजिटल क्रांति' लाने का और 'cashless economy' का। 
demonetisation और पैसे निकालने की लिमिट के चलते देश का आम आदमी पहले से ही कैशलेस हो चूका था फिर ये अतिरिक्त प्रयास क्यों ? रही बात डिजिटल क्रांति की तो मोदी जी को ये कॉमन सी बात अपने दिमाग में डाल लेनी चाहिए थी कि जिस देश की आधी आबादी निरक्षर हो , वहाँ जबरदस्ती डिजिटल क्रांति करवाने से क्या फायदा होगा। ऐसे लोग मोबाइल और कंप्यूटर के तामझाम को कैसे समझेंगे। और फिर भी अगर ये डिजिटल क्रांति हो भी गयी तो काम पढ़े - लिखे लोगों के साथ धोखाधड़ी के मामले बेतहाशा बढ़ जायेंगे। 
इसलिए मोदी जी को पहले सम्पूर्ण साक्षरता अभियान चलाना चाहिए था।  उसके बाद ही डिजिटल क्रांति सही मायनों में सफल हो सकती है।
यहाँ मैं ये बताना जरूरी समझता हूँ कि मीडिया के ताजा विश्लेषण के अनुसार demonetisation और ऐसे ही अन्य तुगलकी फरमानो की वजह से लोगों को परेशानियाँ तो उठानी ही पड़ी ,साथ ही देश को आर्थिक स्तर पे भी घाटा सहना पड़ा। 
मतलब कि मोदी जी के फैसलों से फायदा नाममात्र का हुआ है और बेशुमार नुकसान ,
इसलिए यही है तुगलकी फरमान। .!!

Thursday, June 22, 2017

67th Day :: why i couldn't laugh at the comedy shows and films in india

आजकल tv channels पर comedy shows की बाढ़ सी आ गयी है और साथ ही आ गयी है इनपर भद्दे और अश्लील comments की बाढ़।
 एक अच्छा कॉमेडियन खुद पर व्यंग्य करके कॉमेडी पैदा करता है(जैसे कि सर्कस में एक जोकर करता है) न कि दूसरों की खिल्ली उड़ाकर और अश्लील कमेंट्स की मदद लेकर।
जैसा कि मैंने पहले भी बाज़ारवाद के post में लिखा है कि दिक्कत किसी वस्तु को बेचे जाने से नहीं होती बल्कि बाजार के saturated होने के बाद जबरदस्ती जरुरत पैदा करने की कोशिश से होती है।  और कॉमेडियंस को sexual topics और guests की खिल्ली उड़ाने वाले टॉपिक्स ऐसे ही आसान मुद्दे लगते हैं। जिनसे रोज के show के लिए मसाला मिल जाता है otherwise अच्छे मुद्दों पर कॉमेडी करने के लिए ज्यादा मेहनत और ज्यादा time की जरूरत होती है जो ये कॉमेडियन करना नहीं चाहते ।
कभी -कभी तो ये कॉमेडी guests और public के लिए भी असह्य हो जाती है।  इसलिए कॉमेडी करते समय guests और दर्शकों की भावनाओं का सम्मान करना चाहिए।
 ..........jai hind.........
...........be cool...........

Tuesday, June 6, 2017

66th Day :: Misuse of Confusion in Politics

Confusion has its own pros & cons. I had tell you before in my previous post that confusions are beneficial specifically in research because it helps to break set limits even when you don't have much will power to break it .  but its bad result is that it conjume much time and still results we get maybe wrong..because by the state of confusion we could  get the power to open an unknown gate but we didn't know that gate opens in the way of heaven or hell .so if we are in the state of confusion, we need somebody who knows the right way and at whom we can fully trust .
  but by our bad fate more people in the world are just opposite . such people who instead  of saving us from confusion, tries to get gain by throwing us in the situation of confusion.
these are those opportunist 50/50 type people who behave you good as well as bad behavior so that you never can decide to oppose them . and by this gain they reigne on us . they always  remain in contact with both the good as well as bad people . and thus by making quarrel between good and bad they reign on us . they never want to make justice , they just want to controll people so that they can reigne ...

.......jai hind.....!

65th day ::: जीत-हार का क्रम :: कितनी सच्चाई कितना भ्रम

कुछ दुर्भाग्यशाली लोगों (जिनके guardians लापरवाह होते हैं ) को छोड़कर बाकी सभी लोगों को जन्म से ही जीतना सिखाया जाता है। ऐसा करना पुरी तरह गलत भी नहीं है लेकिन हम जीतना सिखाते हुए ये सिखाना भूल जाते हैं कि जीत किस कीमत पर पाना चाहिए । हमें ये ध्यान देना चाहिए कि कहीं हम जीत से मिलाने वाले पैसे या ख़ुशी या सम्मान आदि से ज्यादा जीत हासिल करने के लिए गँवा तो नहीं रहे ?
     आजकल दुनिया में ऐसी ही आपाधापी मची है। सबको जीत चाहिए चाहे उसके लिए कुछ भी कीमत चुकानी पड़े। ऐसे लोग ही अधिकतर कुछ चालाक लोगो का काम या तो प्यादा बनकर जीतने के लिए करते है या फिर किंग बनकर न हारने के लिए ही करते हैं।
कीमत चुकाने के उदहारण के तौर पर देखें तो एक छोटी सी नौकरी पाने के लिए लोग 5-10 लाख तक रिश्वत देने को तैयार रहते हैं। चाहे उतनी रकम वसूलने में जिंदगी ही क्यों न गुजर जाए।
दूसरे उदाहरण के तौर पर हम देख सकते है कि जीत और पैसे के लिए लोग कितना नीचे गिर जाते हैं।  यहाँ तक कि लोग murder , molestation  और rape से भी बाज नहीं आते।
हमें किसी को जीतना सिखाने से पहले यह सिखाना चाहिए कि उस जीत को पाने के लिए किस हद तक जाना चाहिए। मैंने देखा है कि जिस हद तक हम molesters आदि का विरोध करते है , उससे कहीं ज्यादा हद तक molesters आदि अपने बॉस से इनाम पाने के लिए ऐसा करने को तैयार रहते हैं।
         इसलिए हमें अपने बच्चों को जीतना सिखाते हुए ये जरूर सिखाना चाहिए कि जीत केवल तभी तक जरूरी है जब तक कि जीतना सही हो वरना गलत होने पर हारना , जीतने से अच्छा है।  यहाँ तक कि भले ही एक छोटे से बच्चे से हारना पड़े।

........jai hind......jai bhaarat.................! 

Friday, June 2, 2017

63rd day :: A salute to real boldness

हमारी फिल्म इंडस्ट्री और समाज में भी लड़कियों के कपडे उतारने को ही बोल्डनेस का पर्याय माना जाता है।  लेकिन कुछ दिनों पहले मैंने  रियल बोल्डनेस  को देखा।  मैंने देखा कि कैसे कुछ साधारण लड़कियों और हीरोइनों तक ने अपने साथ हुए molestetion और sexual abuse की घटना को खुलेआम सबके सामने रखा। ऐसा करने के लिए बहुत ही courage की जरूरत थी , जो इन लड़कियों में थी।  साथ ही इसी courage की कमी की वजह से कई दोषीं अपराधी सजा से बच जाते हैं। 

Saturday, February 25, 2017

62th day :: Computer hi Computer hai, Solution kuch pata nahi

आज की दुनिया में कंप्यूटर का बहुत महत्त्व है।  कंप्यूटर ने हमारे बहुत से काम आसान कर दिए है।  वास्तव में कंप्यूटर ने भगवान् का रूप ले लिया है।  आपको जानकार आश्चर्य होगा क़ि अब ये सिर्फ कहने की ही बात नहीं रह गयी है यह सच है , आज परम कंप्यूटर ने परमात्मा की जगह ले ली है।  हमसे जो कहा जाता है कि परमात्मा सब देख , सुन और जान रहा है , वो असल में कोई व्यक्ति होता है जो परम कंप्यूटरों के माध्यम से हमारी जानकारियां चुरा रहा होता है। दुनिया भर में कुल 50 -100  सुपर कंप्यूटर, परम कंप्यूटर या क़्वांटम कंप्यूटर होंगे जो इन्ही तरह के कामो में लगे है। अगर इनका उपयोग समाज की भलाई के लिए और बुरे लोगों के खिलाफ  होता तो शायद इतनी दिक्कत की बात नहीं थी लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो रहा है , बल्कि इसका ठीक उल्टा यानी कुछ पावरफुल लोगों द्वारा आम लोगों के खिलाफ और scientists की कीमती जानकारिया चुराने में  हो रहा है।
आइये मैं आपको detail में बताता हूँ -

1.   Listener Computer :-  इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा आपकी सभी बातें चाहे वो कितनी ही निजी क्यों न हो सुनी जा सकती हैं , यहां तक कि आपके बैडरूम की बातें भी। अब आप ही सोचिये कि दुनिया में कितने ऐसे लोग होंगे जो आपके बैडरूम की बातें जानकर  उसका सही इस्तेमाल करेंगे। आपकी बात सुनने के लिए ये शायद आपको एक ख़ास तरह का पेय या खाद्य पदार्थ आपको दे दें।

2.   Eye Reader :-  इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा आपके द्वारा देखी जाने वाली हर चीज कोई दूसरा देख सकता है , यहां तक कि बैडरूम में आप क्या कर रहे हैं वो भी।  अब ऐसे दृश्यों का कितने लोग सही इस्तेमाल करते होंगे ? आपकी आंखों से देखने के लिए भी ये शायद आपको एक ख़ास तरह का पेय या खाद्य पदार्थ आपको दे दें।

3.   Mind Reader :-  इस तरह का कंप्यूटर ऊपर के दोनों कंप्यूटरों से ज्यादा खतरनाक है।  इसकी मदद से आप क्या सोच रहे हैं , ये भी पता लगाया जा सकता है।  आप सभी जानते हैं कि हमारा दिमाग एक ऐसी प्रयोगशाला है जिसमें 99 गलत प्रोडक्ट बनने के बाद ही एक सही प्रोडक्ट बनता है। ऐसे में हमारे 99 गलत प्रोडक्ट के आधार पर हमें कितना ब्लैकमेल किया जा सकता है? ऐसा करने के लिए भी ये शायद आपको एक ख़ास तरह का पेय या खाद्य पदार्थ आपको दे दें।

4.   Internet Reader :-   इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा इन्टरनेट पर आपकी सारी  activities और histori  जैसे कि अभी आप नेट पर क्या कर रहे हैं , से लेकर past में आपने क्या-क्या सर्च किया , क्या देखा , क्या पसंद किया , क्या नापसंद किया।, एडल्ट डेटिंग साइट पर गए या नहीं , पोर्न देखा कि नहीं जैसी सारी जानकारियां जुताई जा सकती हैं और कहने की बात नहीं है कि इसके आधार पर आपको ब्लैकमेल भी किया जा सकता है।

5.  Some anti- Computers :-  ये कुछ ऐसे कंप्यूटर हैं जो खासकर ऊपर के कंप्यूटरों के प्रभाव से बचने के लिए बनाये गए हैं।  मैं इनके बारे में ज्यादा नहीं कहना चाहूंगा क्योंकि हो सकता है ये समाज की भलाई के लिए हों।

6.  Climate Change  :-  इस तरह के कंप्यूटर के द्वारा किसी भी तरह का मौसम परिवर्तन संभव है।  उदाहरण के लिए अगर satelight में एक बड़ा लेंस फिट कर के सूरज की किरणों को एक ख़ास दिशा में मोड़ दिया जाए तो उस दिशा में गर्मी और दूसरी दिशा में छाया या ठंडी हो जायेगी।

7.  Scary Scene Creater :-  इस तरह के कंप्यूटर द्वारा किसी के भी घर में scary scene create की जा सकती है।  जिसके लिए 3d sound , 3d picture , some light effect etc का इस्तेमाल किया जा सकता है। हो सकता है कि आपके घर के आसपास कुछ साउंड बॉक्स और मशीनें रखी हों , जिनसे 3d sound aur 3d picture create की जा रही हों और आपको लगता हो कि आवाज आपके घर के अंदर से आ रही है।  जैसा कि हेडफोन से 3d sound सुनते हुए लगता है , 3d picture के लिए हो सकता है कि टेक्नोलॉजी इतनी बढ़ गयी हो कि 3d picture के लिए आपको स्पेशल चश्मे की जरूरत न पड़े और आपको सब कुछ रियल लगे। जहाँ तक बिजली का सवाल है तो बोर्ड में एक चोट सा चिप लगा कर बल्ब में scary effect  दिया जा सकता है।

8.  Computers for medical tests :-  मेडिकल क्षेत्र में भी संभव है कि विभिन्न प्रकार की बीमारियां पैदा करने वाली दवाएं (खासकर एक निश्चित समय के बाद रियेक्ट करने वाली ) बनाने के लिए और genetically synthesized बीज , जानवर और इंसान भी बनाने के लिए इनका उपयोग होता हो।

वैसे अगर किसी भी ताकत का इस्तेमाल आम जनता की भलाई के लिए हो तो मैं  उसे सही मानता हूँ लेकिन इन ताकतों का सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। भले ही इनका आविष्कार समाज की भलाई के लिए हुआ हो लेकिन जैसा की कहावत है कि मोहब्बत और जंग में सब जायज है , उसी तरह या तो किसी के लगाव में या किसी  से नफरत में इन लोगों ने इंसानियत की सारी  सीमाएं पार  कर दी। हालात ये है कि एक दुश्मन की जानकारी जुटाने के लिए ये हजारों , लाखों लोगों की निजी जानकारियों से खिलवाड़ करने से नहीं चूकते।
अंत में मैं बस यही कहना चाहता हु कि इस तरह के ताकत का इस्तेमाल सिर्फ कुछ बुरे लोगों के खिलाफ जानकारी जुटाने के लिए और सीमित मात्रा में होना चाहिए अथवा इन्हें पूरी तरह से नष्ट कर दिया जाना चाहिए।